चाहे हम सहमत हों अथवा नहीं लेकिन " The legend of Bhagat Singh " फिल्म का यह कालजयी संवाद अपने आप में समस्त बदलावों के प्रारंभ की व्याख्या कर देता है |
आज एक राष्ट्र के रूप में हमारे अस्तित्व पर जो संकट आन पड़ा है उसकी आहट न तो देश के नीति-नियंताओं को सुनाई पड़ रही है और ना ही हमारी जनसँख्या का एक बड़ा हिस्सा उसके बारे में कोई अनुमान लगाने में समर्थ है | भारत की वर्तमान व्यवस्था में इन सकटों का सामना करने एवं विश्व - पटल पर राष्ट्र को गौरवशाली रूप में स्थापित करने के लिए आज जो स्वर चाहिए वो किसी बड़े धमाके के रूप में ही होना चाहिए |
संयमित और मीठी - मीठी चापलूसी भरी बातें करके ' महात्मा ' बना जा सकता है किन्तु विजेता बनने और जन - गण - मन के गौरव और स्वाभिमान की स्थापना करने के लिए हमें अपनी स्वर लहरियों को तलवार की ही धार देनी होगी | आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस राष्ट्र के लिए यह बीड़ा कौन उठाएगा ? लेकिन यहाँ जवाब किसी और से नहीं बल्कि स्वयं से पूछना है |
जवाब भी बड़ा ही सीधा सा है , देशहित में जो भी बात हमें उचित जान पड़ती है उसको डंके की चोट पर एक बड़े धमाके साथ सबके सामने लाइए | जो बात सत्यता की पुष्टि करती हो और देशहित में प्रधान हो हमें उसके लिए चाहे कितनी भी बड़ी छद्म नैतिकता को भूलना पड़े , स्वीकार्य है |
|| " सत्यमेव जयते " ||
आज एक राष्ट्र के रूप में हमारे अस्तित्व पर जो संकट आन पड़ा है उसकी आहट न तो देश के नीति-नियंताओं को सुनाई पड़ रही है और ना ही हमारी जनसँख्या का एक बड़ा हिस्सा उसके बारे में कोई अनुमान लगाने में समर्थ है | भारत की वर्तमान व्यवस्था में इन सकटों का सामना करने एवं विश्व - पटल पर राष्ट्र को गौरवशाली रूप में स्थापित करने के लिए आज जो स्वर चाहिए वो किसी बड़े धमाके के रूप में ही होना चाहिए |
संयमित और मीठी - मीठी चापलूसी भरी बातें करके ' महात्मा ' बना जा सकता है किन्तु विजेता बनने और जन - गण - मन के गौरव और स्वाभिमान की स्थापना करने के लिए हमें अपनी स्वर लहरियों को तलवार की ही धार देनी होगी | आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस राष्ट्र के लिए यह बीड़ा कौन उठाएगा ? लेकिन यहाँ जवाब किसी और से नहीं बल्कि स्वयं से पूछना है |
जवाब भी बड़ा ही सीधा सा है , देशहित में जो भी बात हमें उचित जान पड़ती है उसको डंके की चोट पर एक बड़े धमाके साथ सबके सामने लाइए | जो बात सत्यता की पुष्टि करती हो और देशहित में प्रधान हो हमें उसके लिए चाहे कितनी भी बड़ी छद्म नैतिकता को भूलना पड़े , स्वीकार्य है |
|| " सत्यमेव जयते " ||
